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लोकवृत्त (पब्लिक स्फियर):

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अरुण हिंदी शब्दकोश


: लोकवृत्त (पब्लिक स्फियर) :

लोकवृत्त अथवा लोकक्षेत्र को विद्वानों ने आज के सन्दर्भ में बेहद महत्त्वपूर्ण माना है। उनके अनुसार लोक-क्षेत्र नागरिक समाज का वह हिस्सा है जहाँ विभिन्न समुदाय और संस्कृतियाँ अन्योन्य-क्रिया करती हैं। ऐसा करके वे किसी मुद्दे पर आम-राय बनाने और उसके ज़रिए राज्य-तंत्र को प्रभावित करने का प्रयास करतीं हैं। लोक-क्षेत्र सभी के लिए खुला रहता है जिसमें अपने विमर्श के ज़रिए कोई भी हस्तक्षेप कर सकता है। हैबरमाॅस इसके महत्त्वपूर्ण प्रतिपादक हैं। यहाँ नागरिक-समाज कहने का आशय ‘सिविल सोसायटी’ से है। अर्थात् समाज का वह रूप जो राज्य एवं परिवार जैसी संस्थाओं से अलग माना जाता है। यह नागरिकों के अधिकारों और उनकी सत्ता को व्यक्त करने वाली प्रक्रियाओं और संगठनों से मिलकर बनता है। वह राज्य को सयंमित कर उसे नागरिक नियंत्रण में लाता है।  समाजविज्ञानियों के अनुसार, समाजशास्त्र में नागरिक समाज के एक ऐसे दायरे की चर्चा भी है जिसमें संस्कृति और समुदाय की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ अन्योन्यक्रिया करती हैं। साथ ही, सार्वजनिक दायरे की गतिविधियाँ किसी मुद्दे पर आम राय बनाने और उसके जरिए राज्य-तंत्र को प्रभावित करने की भूमिका निभाती हैं। सार्वजनिक दायरा सबके लिए खुला रहता है जिसमें अपने विमर्श के जरिए कोई भी हस्तक्षेप कर सकता है। फ्रैंकफुर्त स्कूल के विख्यात विचारक युरगन हैबरमास ने इस धारणा का प्रतिपादन किया था; जिसका भारत की हिन्दीपट्टी तक दृढ़ विस्तार हुआ है। इस बाबत फ्रांचिस्का आॅरसेनी लिखित पुस्तक ‘हिन्दी का लोकवृत्त’ द्रष्टव्य है।फ्रांचिस्का आॅरसेनी लिखित पुस्तक ‘हिन्दी का लोकवृत्त’ भारतीय सन्दर्भ में एक महत्त्वपूर्ण कृति है। 

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