Skip to main content

हाम्रो अरुणाचल


---------------------

अपना अरुणाचल प्रदेश तिरासी हजार सात सौ तैतालिस वर्ग किलोमीटर(83, 743 ेुउ) भूभाग में फैला हुआ है। इसकी राजधानी ईटानगर है, तो नजदीकी शहर नाहर लगुन। ईटानगर और नाहर लगुन इतने करीब हैं कि इन्हें जुड़वा राजधानी तक कहा जाता है। ईटानगर पहुँचने के लिए रेलमार्ग का नजदीकी प्लेटफार्म नाहर लगुन ही है। पिछले वर्ष यानी वर्ष 2015 में शुरू हुई रेलवे-यातायात ने अरुणाचल को अन्य प्रदेशों से जोड़ने की दृष्टि से सुगम-सहज माध्यम उपलब्ध कराया है। 

अरुणाचल के रहवासियों की कुल आबादी लगभग 11 लाख है। इस प्रदेश में नए-पुराने मिलाकर कुल 16 जिले हैं। 1) अन्जाव(जिला मुख्यालय: हवाई), 2) चांगलांग(जिला मुख्यालय: चांगलांग), 3) दिबांग घाटी(अनिनी), 4) पूर्वी सियांग(जिला मुख्यालय: पासीघाट), 5) पूर्वी कमेंग(जिला मुख्यालय: सेपा), 6) कुरूंग कुमेय(जिला मुख्यालय: कोलोरियांग), 7) लोहित(जिला मुख्यालय: तेजू) 8) निचली दिबांग घाटी(जिला मुख्यालय: रोइंग), 9) निचली सुबनसिरी(जिला मुख्यालय: जिरो), 10) पापुम-पारे(दोईमुख), 11) तवांग(जिला मुख्यालय: तवांग), 12) तिराप(जिला मुख्यालय: खोंसा), 13) ऊपरी सियांग(जिला मुख्यालय: यिंगकियांग), 14) ऊपरी सुबनसिरी(जिला मुख्यालय: दपोरिजो), 15) पश्चिमी सियांग(अलोंग), 16) पश्चिमी कमेंग(जिला मुख्यालय: बाॅमडिला)।

अरुणाचल प्रदेश 1962 ई. से पूर्व ‘नेफा’(नार्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी) के नाम से जाना जाता था। यह उस समय सांविधानिक तौर पर असम के अधिकार-क्षेत्र का विस्तृत भूभाग था। सन् 1972 ई. में इसे संघीय राज्य-क्षेत्र के अन्तर्गत शामिल किया गया; तदुपरान्त 20 फरवरी, 1987 ई. को इसे भारत के 24वें स्वतन्त्र राज्य के रूप में ‘अरुणाचल प्रदेश’ नाम से अभिहित किया गया।.....  


जारी.....,

Comments

Popular posts from this blog

पूँजीवादी आधिपत्य

----------- अरुण हिंदी शब्दकोश : पूँजीवादी आधिपत्य : जीवित रहने के लिए मनुष्य खाने-पीने की चीजें पैदा करते हैं; पहनने के लिए कपड़े बनाते हैं, रहने के लिए घर बनाते हैं। इस क्रम में वे आपस में उत्पादन का सम्बन्ध कायम करते हैं। भारत में लोक की भूमिका निर्णायक थी जो सभी को आपसी सामंजस्य और संतुलन के साथ गुजर-बसर करने की अनुमति प्रदान करता था। बाद में औद्योगिक पूँजीवाद ने लोक-संस्कृति अथवा ग्राम-स्वराज की सार्वभौम धारणा को खंडित कर दिया। उसने औद्योगि पूँजीवाद की जो अवधारणा रखी उसमें बड़ा पूँजीपति छोटे पूँजीपति को खा जाता है। वह मजदूरों की श्रम-शक्ति का ही अपहरण नहीं करता, वरन् छोटे पूँजीपतियों का, उनके व्यवसाय का, अपहरण भी करता है। वर्तमान में पूँजी का केन्द्रीकरण जिस खतरनाक तरीके से हो रहा है, भयावह है। यह पूँजीवादी आधिपत्य की नई स्थिति है जिसमें बाज़ार पूँजीकरण के सहारे वैश्विक कब्जे की तैयारी अन्दर ही अन्दर की जाती है। पूँजीपति जो काम करते हैं वह यह है कि उत्पादन के साधनों में तेजी से तरक्की करते हैं। इस तरह वे बड़े पैमाने पर बिकाऊ माल पैदा करते हैं। इस बिकाऊ माल से पिछड़े हुए दे...

अरुणाई का ‘बाल अंक’

लोकवृत्त (पब्लिक स्फियर):

------------- अरुण हिंदी शब्दकोश : लोकवृत्त (पब्लिक स्फियर) : लोकवृत्त अथवा लोकक्षेत्र को विद्वानों ने आज के सन्दर्भ में बेहद महत्त्वपूर्ण माना है। उनके अनुसार लोक-क्षेत्र नागरिक समाज का वह हिस्सा है जहाँ विभिन्न समुदाय और संस्कृतियाँ अन्योन्य-क्रिया करती हैं। ऐसा करके वे किसी मुद्दे पर आम-राय बनाने और उसके ज़रिए राज्य-तंत्र को प्रभावित करने का प्रयास करतीं हैं। लोक-क्षेत्र सभी के लिए खुला रहता है जिसमें अपने विमर्श के ज़रिए कोई भी हस्तक्षेप कर सकता है। हैबरमाॅस इसके महत्त्वपूर्ण प्रतिपादक हैं। यहाँ नागरिक-समाज कहने का आशय ‘सिविल सोसायटी’ से है। अर्थात् समाज का वह रूप जो राज्य एवं परिवार जैसी संस्थाओं से अलग माना जाता है। यह नागरिकों के अधिकारों और उनकी सत्ता को व्यक्त करने वाली प्रक्रियाओं और संगठनों से मिलकर बनता है। वह राज्य को सयंमित कर उसे नागरिक नियंत्रण में लाता है।  समाजविज्ञानियों के अनुसार, समाजशास्त्र में नागरिक समाज के एक ऐसे दायरे की चर्चा भी है जिसमें संस्कृति और समुदाय की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ अन्योन्यक्रिया करती हैं। साथ ही, सार्वजनिक दायरे की गतिविधियाँ किसी...